islamic Shayari

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islamic Shayari
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Aadam Ko Ye Tohfa , Ye Hadiya Na Mila
Aisa Tou Kisi Bashar Ko Paya Na Mila
Allah Re Latafat.e.Tann.e.Pak.e.Rasool
Dhoonda Kia Aftab Sayaa Na Mila

Bashar ki sar-bulandi me bhi koi raaz hota hai
Jo sar dede Sar-e-maidan wahin sarfaraz hota hai
Aur tum kya samjhoge mere NABI ki azmat
Jahan pe khatam hoti hai hudood-e-aql-insani
Wahin se MOHAMMED SALALLAHO ALAYHE WASALLAM ki Shaan ka aaghaz hota hai

खा कर कस्म हम रब से ये वादा करते है
तेरे मेहबूब के फरमान पर हम ये अमलभी करते है
करते है आज भी वफादारी हम उस वतन से
जिस वतन की खुश्बू का ज़िक्र मेरे आक़ा करते है

HAQ PARASTO KO NABI KI REHBARI ACHHI LAGI
FARZ ME SUNNATEIN MILI TO BANDAGI ACHHI LAGI
SALALLAHO ALAYHE WASALLAM

राह में अंधेरा है और दिया नहीं लेते।।
नौजवान क्यूँ दर्से करबला नहीं लेते।।
हर मरज़ पे क़ाबिज़ है जो दवा, नहीं लेते।।
आयतों से क़ुरआँ की फ़ायदा नहीं लेते।।
इसलिये तरक़्क़ी की राह खो चुके हम लोग,
बैठ कर बुज़ुर्गों से मशवरा नहीं लेते।।
ग़ैर की बुराई पर उँगलियाँ उठाते हैं,
अपनी ज़िन्दगानी का जायज़ा नहीं लेते।।
तज़केरा तो करते हैं हुर का रात दिन लेकिन,
राहे हक़ में हुर जैसा फ़ैसला नहीं लेते।।
वक़्त की ख़राबी है सोचिये अगर हम लोग,
मीलादों महाफ़िल से फ़ायदा नहीं लेते।।
दूर हैं नमाज़ों से, आरज़ू है जन्नत की,
जो मिलादे मन्ज़िल से वो पता नहीं लेते।।
हक़ बयाँ नहीं करते ख़ौफ़े मौत से हम, क्यूँ,
शहीदों की शहादत से हौसला नहीं लेते।।

मत रख इतनी नफ़रतें अपने दिल में ए इंसान*
*जिस दिल में नफरत होती है उस दिल में रब नहीं बसता

मुल्क लुट जाएगा ये आसार नज़र आते हैं,
अब हुकूमत में सब मक्कार नज़र आते हैं,
मुल्क की आज़ादी में लुटा दीं जानें हमने,
और बेहयाओं को हम ही ग़द्दार नज़र आते हैं

इस्लामिक शायरी
इस्लामिक शायरी

*सजदे की खूबसूरती यह है कि*
*हम फर्श पर सिर रख कर जो कहते है*
*वो अर्श पर सुनी जाती है।*

WO KHUDA KE NOOR KO DEKH KAR
BHI JAHAN WALO ME AA GAYE
SAR E ARSH JAANA KAMAAL THA
YA WAHAN SE AANA KAMAAL HAI
SALALLAHO ALAYHE WASALLAM

मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है
हुकूमत के इशारे पर तो मुर्दा बोल सकता है
हुकूमत की तवज्जो चाहती है ये जली बस्ती
अदालत पूछना चाहे तो मलबा बोल सकता है
कई चेहरे अभी तक मुँहज़बानी याद हैं इसको
कहीं तुम पूछ मत लेना ये गूंगा बोल सकता है
यहाँ पर नफ़रतों ने कैसे कैसे गुल खिलाये हैं
लुटी अस्मत बता देगी दुपट्टा बोल सकता है
बहुत सी कुर्सियाँ इस मुल्क में लाशों पे रखी हैं
ये वो सच है जिसे झूठे से झूठा बोल सकता है
सियासत की कसौटी पर परखिये मत वफ़ादारी
किसी दिन इंतक़ामन मेरा गुस्सा बोल सकता है

KHUDA JAB KISI KI HIFAZAT KI THAAN LETA HAI
MAKDI KE ZAALE KI WO CHADAR TAAN DETA HAI
AGAR WO ZINDAGI LIKH DE SAMUNDAR RAAH DE DEGA
AGAR WO MAUT LIKH DE MACHHAR JAAN LE LEGA

न आना मौत की अभी मेरा किरदार बाकि हे*
*लाया था जो अपने रब से वो उधार बाकि हे*
*दीद तो हो गई बहोत खुशियो की ग़ालिब*
*लेकिन अभी आक़ा के रोज़े का दीदार बाकि हे

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