Imran Pratapgarhi Shayari

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Imran Pratapgarhi Shayari
Imran Pratapgarhi Shayari

मेरी आंखों का प्रस्ताव ठुकरा के तुम,
मुझसे यूं न मिलो अजनबी की तरह !
अपने होठों से मुझको लगा लो अगर,
बज उठूंगा मैं फिर बांसुरी की तरह …….!
तुमको देखा तो सांसों ने मुझसे कहा,
ये वही है जिसे था तलाशा बहुत !
शब्द हैरान हैं व्यक्त कैसे करें,
होठ कैसे कहें मैं हूं प्यासा बहुत !!

मैं भी ख़ुद को समंदर समझने लगूं,
तुम जो मिल जाओ आकर नदी की तरह …..!
मुझसे यूं न मिलो अजनबी की तरह
चांद चेहरे को सब शायरों ने कहा,
मैं भी कैसे कहूं, चांद में दाग़ है !
दूध में थोड़ा सिंदूर मिल जाए तब,
तेरा चेहरा उसी तरह बेदाग़ है !!

धूप से रूप तेरा बचाऊंगा मैं,
सर पे रख लो मुझे ओढ़नी की तरह……!
मुझसे यूं न मिलो अजनबी की तरह
लड़खड़ाई हुई ज़िंदगी है मेरी,
थाम लो मुझको मेरा सहारा बनो !
तुम जो पारो बनो देव बन जाऊं मैं,
वीर बन जाऊं मैं तुम जो ज़ारा बनो !

Imran Pratapgarhi Hindi Shayari
Imran Pratapgarhi Hindi Shayari

तुम निगाहों से दे दो इजाज़त अगर,
गुनागुना लूं तुम्हें शायरी की तरह

ख़ून से सींचता है बग़ीचे को जो,
मेरी नज़रों में वो बाग़बां आप हैं !
हम सभी छात्र तो हैं ज़मीं की तरह,
हमपे छाए हुए आसमां आप हैं,…..!!!

जाति की डोर ना बांध पाई कभी,
आप हिन्दू रहे ना मुसलमां रहे !
इक तरफ़ होठ पर श्लोक गीता के तो,
दूसरी ओर होठों पे कलमा रहे !!
नफ़रतों से झुलसते हुए देश में,
देखिए एकता के निशां आप हैं….!!!
मेरी नज़रों में वो बाग़बां आप हैं …..!!!

हम सभी से अगर कोई ग़लती हुई,
आपने हमको मौक़ा दोबारा दिया !
पांव जो लड़खड़ाए कभी राह में,
आपने हमको बढ़ के सहारा दिया !!
दिल में ममता के सागर छुपाए हुए,
मेरी नज़रों में तो एक मां आप हैं……!!
मेरी नज़रों में वो बाग़बां आप हैं…..!!!

आप थोड़ा सा गर चेत जाएंगे तो,
देश का पूरा नक़्शा बदल जाएगा !
देश का जो युवा गर्त में जा रहा,
उसका बहका भी क़दम सम्भल जाएगा !!
आपके साथ में नौजवां देश का,
सच में तनहा नहीं कारवां आप हैं….!!
मेरी नज़रों में वो बाग़बां आप हैं….!!!

बापू का कातिल कौन है ..? इंदिरा का कातिल कौन है …?
राजीव को किसने क़त्ल किया ..? इस पर संसद क्यूँ मौन है !

नक्सली उधर हथियार लिए, लश्कर के लश्कर आते हैं….. !
अफ़सोस मगर आतंक के हर इलज़ाम मेरे सर आते हैं….. !!

उल्फा हो लिट्टे या बोडो, हम सब का इस से क्या लेना,,
कानून के गाल पे रोज़ तमाचा, मार रही है शिव सेना !
गाँधी जी साबरमती में बैठे, आज तलक शर्मिंदा हैं,,
क्यूंकि गुजरात में कुर्सी पर, मासूमों के कातिल जिंदा हैं !!

उनको कुर्सी दी जाती है, जो दंगों को भड़काते है…..!
अफ़सोस मगर आतंक के हर, इलज़ाम मेरे सर आते हैं !!

ये ताजमहल ये लालकिला, ये जितनी भी तामीरें हैं,,
जिन पर इतराते फिरते हो , सब पुरखों की जागीरें हैं !!
जब माँगा वतन ने खून, बदन का सारा लहू निचोड़ दिया,,
अफ़सोस मगर इतिहास ने ये, किस मोड़ पे लाके छोड़ दिया !!
उनके हिस्से में किले मेरे, हिस्से में छप्पर में आते हैं….!
अफ़सोस मगर आतंक के हर, इलज़ाम मेरे सर आते हैं….!!
“प्यार की बड़ी इससे और मिसाल क्या होगी, हम नमाज़ पढ़ते हैं गंगा में वज़ू करके…”
“प्यार की बड़ी इससे और मिसाल क्या होगी,

हवा कुछ ऐसी चली है बिखर गए होते रगों में खून न होता तो मर गए होते
हवा कुछ ऐसी चली है बिखर गए होते
रगों में खून न होता तो मर गए होते

ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ
हम अपने शहर में होते तो घर गए होते

हमीं ने जख्मे -दिलो-जाँ छुपा लिए वरना
न जाने कितनों के चेहरे उतर गए होते

हमें भी दुख तो बहुत है मगर ये झूठ नहीं
भुला न देते उसे हम तो मर गए होते

सुकूने -दिल को न इस तरह से तरसते हम
तेरे करम से जो बच कर गुजर गए होते

जो हम भी उस से जमाने की तरह मिल लेते
हमारे शामो – ओ शहर भी संवर गए होते

न टपके ज़मीं पर कोई अश्क बह के, दिखा दो ये उसका दिया ग़म भी सह के।

ये आंसू हैं मोती इन्हें मत लुटाओ, तुम्हें है कसम तुम ज़रा मुस्कुराओ।

नहीं बांटने से हंसी ख़त्म होती। यहीं पर.

यहीं पर नहीं ज़िंदगी ख़त्म होती,

Imran Pratapgarhi Shayari Hindi
Imran Pratapgarhi Shayari Hindi

गर अपना कोई बेवफ़ा हो गया है,
समझ लो कि इक हादसा हो गया है।
नहीं इससे हर इक ख़ुशी ख़त्म होती। यहीं पर…….

ख़ता दूसरे की सज़ा ख़ुद को मत दो,
ज़हर जिसमें हो वो दवा ख़ुद को मत दो।
न देखो कि कुछ लोग क्या कर रहे हैं,
हैं एकाध तो जो दुआ कर रहे हैं।
भुला दो वो गुज़री हुई सारी बातें,
समझ लो अंधेरे भरी थी वो रातें।
और इससे नहीं रौशनी ख़त्म होती। यहीं पर……
हुआ जो भी वो सब यकायक नहीं था,
यही सच है वो तेरे लायक नहीं था।
न टपके ज़मीं पर कोई अश्क बह के,
दिखा दो ये उसका दिया ग़म भी सह के।
ये आंसू हैं मोती इन्हें मत लुटाओ,
तुम्हें है कसम तुम ज़रा मुस्कुराओ।
नहीं बांटने से हंसी ख़त्म होती। यहीं पर……….
तुम इस तरह ख़ुद को अकेले न छोड़ो,
ये दुनिया, ये दुनिया के मेले न छोड़ो।
अगर उसकी यादें हैं दिल से भुलाना,
मेरा गीत ये साथ लेकर के जाना।
तुम्हें बीते दिन याद बरबस दिलाकर,
तेरे टूटे दिल को यूं ढांढस बंधाकर।
है इमरान की शायरी ख़त्म होती। यहीं पर……..
Imran Pratapgarhi Shayari, Imran Pratapgarhi Shayari