Ahmad Faraz Shayari Photo

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Ahmad Faraz Shayari Photo
Ahmad Faraz Shayari Photo

ज़िन्दगी तो अपने ही क़दमों पे चलती है “फ़राज़ “
लोगो के सहारे तो जनाज़े उठा करते हैं

हम पे फ़क़त इलज़ाम के हम हैं ज़ुबान दर्ज़ “फ़राज़”
हम ने तो बस कहा था हमें तुम से प्यार है

वो बेवफा न था यूं ही बदनाम हो गया ” फ़राज़ “
हज़ारों चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करता वो
तेरा न हो सका तो मर जाऊंगा “फ़राज़ “
कितना खूबसूरत वो झूट बोलता था

हम न बदलेंगे वक़्त की रफ़्तार के साथ ‘”फ़राज़”‘
हम जब भी मिलेंगे अंदाज़ पुराना होगा …

Ahmad Faraz Shayari Pic
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किस की क्या मजाल थी जो कोई हम को खरीद सकता “फ़राज़”
हम तो खुद ही बिक गए खरीदार देख कर

कौन देता है उम्र भर का सहारा ऐ “फ़राज़’
लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं

यह वफ़ा तो उन दिनों की बात है “फ़राज़”
जब मकान कच्चे और लोग सच्चे हुआ करते थे

कुछ इश्क़ का नशा था पहले हम को “फ़राज़”.
दिल जो टूटा तो नशे से मोहब्बत हो गई .

Ahmad Faraz Sher
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हम उन से मिले तो कुछ कह न सके “फ़राज़”
ख़ुशी इतनी थी के मुलाक़ात आँसू पोंछते ही गुज़र गई

तू किसी और के लिए होगा समंदर-ऐ -इश्क़ “फ़राज़”
हम तो रोज़ तेरे साहिल से प्यासे गुज़र जाते हैं

किसी से जुदा होना अगर इतना आसान होता “फ़राज़”
जिस्म से रूह को लेने कभी फरिश्ते न आते
Ahmad Faraz Shayari Photo
हम उन से मिले तो कुछ कह न सके “फ़राज़ ”
ख़ुशी इतनी थी के मुलाक़ात आँसू पोंछते ही गुज़र गई
लोग पत्थर के बूतों को पूज कर भी मासूम रहे “फ़राज़”
हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए

वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़”
कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था

Ahmed Faraz Romantic Shayari
Ahmed Faraz Romantic Shayari

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”
यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते

उँगलियाँ आज भी इस सोच में गुम हैं “फ़राज़”
उस ने कैसे नया हाथ थामा होगा.

टूट कर चुभ रहा है आँखों में “फ़राज़”
आईना तो नहीं था ख्वाब मेरा

Ahmad Faraz Shayari Photo

मैं जो महका तो मेरी शाख जला दी उस ने “फ़राज़”
सर्द मौसम में मुझे जर्द हवा दी उस ने

लोग कहते हैं के मुलाक़ात नहीं हुई ” फ़राज़ “
हम तो रोज़ मिलते हैं लेकिन बात नहीं होती

तमाम उम्र मुझे टूटना बिखरना था ” फ़राज़ “
वो मेहरबान भी कहाँ तक समेटता था मुझे

अपनी नाकामी का एक यह भी सबब है ” फ़राज़ ”
चीज़ जो भी मांगते हैं सब से जुदा मांगते हैं

Ahmed Faraz Hindi Shayari Pic
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बस इतना ही कहा था हम बरसो के प्यासे हैं ” फ़राज़ “
होंटो को उस ने चूम कर खामोश कर दिया .

सब रोशनियाँ मुझ से रूठ जाएंगी यह कह कर ” फ़राज़ “
तुम अपने चिरगों की हिफाज़त नहीं करते

उस को तो बिछडने का सलीका भी नहीं आया ” फ़राज़ “
जाते हुए वो खुद को यहीं छोड़ गया

Ahmad Faraz Shayari Photo

एक ही ज़ख्म नहीं सारा बदन ज़ख़्मी है ” फ़राज़ “
दर्द हैरान है के उठूँ भी तो कहाँ से उठूँ

अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे ” फ़राज़ “
क्यों तन्हा से हो गए है तेरे जाने के बाद
ऐ इंसान इब्न-ऐ -आदम से नंगा आया है तू ” फ़राज़ ”
कितना सफर किया है तूने दो गज़ कफ़न के लिये
पानी में अक्स देख कर खुश हो रहा था ” फ़राज़ “
पथर किसी ने मार कर मंज़र ही बदल डाला

प्यासे होंटों से बहुत करता है मीठी बातें
हो के सैराब बदल जाता है लहजा उसका

अहमद फ़राज़ शायरी
अहमद फ़राज़ शायरी

मेरे शिकवों पर उस ने हँस के कहा ” फ़राज़ “
किस ने की थी वफ़ा जो हम करते

आप ही खुद अपनी अदाओं में ज़रा गौर कीजिए ” फ़राज़ “
हम अरज़ करेगें तो शिकायत होगी

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हम सुना रहे थे अपनी बेवफाई का क़िस्सा ” फ़राज़ “
अफ़सोस इस बात का है लोगो ने तो वाह वाह कहा , उन्होंने भी वाह वाह कहा

खुला जो नाम-ऐ-अमल हशर में मेरा ” फ़राज़ “
बस एक जुर्म -ऐ -मुहब्बत मेरे हिसाब में था

मेरे मरने के बाद भी न छोड़ा जलना उस ने ” फ़राज़ “
रोज़ पहना जाती थी फूल मेरी साथ वाली क़बर पर

पहले तराशा उस ने मेरा वजूद शीशे से ” फ़राज़ “
फिर ज़माने भर के हाथों में पत्थर थमा दिए