Meri Adhuri Mohabbat

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ज़मीं पर रह कर आसमां को छूने की फितरत है मेरी,
पर किसी को गिरा कर, ऊपर उठने का शौक़ नहीं मुझे..

Meri Adhuri Mohabbat

Meri Adhuri Mohabbat

भीङ में खङा होना मकसद नहीं हैं मेरा….,
बल्कि भीङ जिसके लिए खडी है वो बनना है मुझे

जो आपकी जिंदगी में कील बनकर बार-बार चुभे..
उसे एक बार हथौड़ी बन कर ठोक देना चाहिए..

मत तोल मोहब्बत मेरी अपनी दिल्लगी से….
चाहत देखकर मेरी अक्सर तराज़ू टूट जाते है

ज़ज़बात पे क़ाबू वो भी मोहब्बत में..,
तूफ़ान से कहते हो चुपचाप गुज़र जाओ.
प्यार करता हु इसलिए फ़िक्र करता हूँ,
नफरत करुगा तो जिक्र भी नही करुगा

चाहता हूँ तुझे दिल में छिपाना
क्युकी बहुत बुरा हैं ये जमाना

दिल की खिड़की से बाहर देखो ना कभी
बारिश की बूँदों सा है एहसास मेरा…
घनी जुल्फों की गिरह खोलो ना कभी
बहती हवाओं सा है एहसास मेरा….
छूकर देखो कभी तो मालूम होगा तुम्हें
सर्दियों की धूप सा है एहसास मेरा

सिर्फ गुलाब देने से अगर मोहब्बत हो जाती,
तो माली सारे ‘शहर’ का महबूब बन जाता…

मेरे बस का नहीं किसी का दिल चुराना।
मैँ तो देखो अपना भी ..♥.. खोए बैठी हूँ|

कमाल की मोहब्बत थी उसको हम से
अचानक ही शुरू हुई और बिन बतायें ही ख़त्म

मोहब्बत करने में चंद लम्हे लगते है
चोट खा कर भूलने में पूरी जिन्दगी लग जाती है

मोहब्बत की मंजिल आसान नहीं है
इससे ऊंचा कोई आसमान नहीं है
भटकते हैं वह जो बेवफाई करते हैं
दिल में जिनके प्यार का अरमान नहीं है

उसकी आँखों में मोहब्बत की चमक आज भी है
हालांकि उसे मेरी मोहब्बत पर शक आज भी है
नाव में बैठ कर धोये थे,हाथ उसने कभी
पूरे तालाब में मेहंदी की महक आज भी है
छू तो नहीं पाया उसे प्यार से कभी
पर मेरे होठों पर उसके होठों की झलक आज भी है
हर बार पूछते हैं,हमारी चाहत का सबब
वैसी ही इश्क की ये परख आज भी है
नहीं रह पते वो भी हमारे बिना
दोनों तरफ इश्क की दहक आज भी है

Shayari Pic