Iqbal Shayari Pic

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Iqbal Shayari Pic
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अमल से ज़िन्दगी बनती है , जन्नत भी जहनुम भी
यह कहा की अपनी फितरत में न नूरी है न नारी है

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पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात
तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा


इश्क़ क़ातिल से भी मक़तूल से हमदर्दी भी
यह बता किस से मुहब्बत की जज़ा मांगेगा
सजदा ख़ालिक़ को भी इबलीस से याराना भी
हसर में किस से अक़ीदत का सिला मांगेगा

Allama Iqbal Hindi Pic
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सौदागरी नहीं , यह इबादत खुदा की है
ऐ बेखबर ! जज़ा की तमन्ना भी छोड़ दे

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उम्र भर तेरी मोहब्बत मेरी खिदमत रही
मैं तेरी खिदमत के क़ाबिल जब हुआ तो तू चल बसी


किसी की याद ने ज़ख्मो से भर दिया सीना
हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी

और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

Allama Iqbal Hindi Shayari Photo
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बड़े इसरार पोशीदा हैं इस तनहा पसंदी में .
यह मत समझो के दीवाने जहनदीदा नहीं होते .
ताजुब क्या अगर इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है
बहुत से लोग दुनिया में पसंददीदा नहीं होते .


तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूँ , सज़ा चाहता हूँ

ज़माना आया है बे – हिजबी का , आम दीदार -ऐ -यार होगा ;
सकूत था पर्देदार जिसका वो राज़ अब आशकार होगा .

Allama Iqbal Hindi Shayari Pic
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इस दौर की ज़ुल्मत में हर कल्बे परेशान को
वो दाग़े मुहब्बत दे जो चाँद को शर्मा दे


मुहब्बत की तमना है तो फिर वो वस्फ पैदा कर
जहाँ से इश्क़ चलता है वहां तक नाम पैदा कर
अगर सचा है इश्क़ में तू ऐ बानी आदम
निग़ाह -ऐ -इश्क़ पैदा कर
मैं तुझ को तुझसे ज़्यादा चाहूँगा
मगर शर्त ये है के अपने अंदर जुस्तजू तो पैदा कर
अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना
तू अपनी आप में पहली अंडायज़ -ऐ -वफ़ा तो पैदा कर


मिटा दे अपनी हस्ती को अगर खुद मुर्तबा चाहे
की दाना खाक में मिलकर गुल ओ गुलज़ार बनता है

Iqbal Shayari Photo
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हंसी आती है मुझे हसरते इंसान पर
गुनाह करता है खुद और लानत भेजता है सैतान पर

आज फिर तेरी याद मुश्किल बना देगी
सोने से काबिल ही मुझे रुला देगी
आँख लग गई भले से तो डर है
कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी


किसी के इश्क़ के हम-ओ-ख्याल थे हम भी कभी
गुजरे ज़माने में बहुत बा-कमाल थे हम भी कभी
ढूंढ़ता फिरता हूँ ऐ इक़बाल अपने आप को
आप ही गोया मुसाफिर आप ही मंज़िल हूँ मैं

उसकी फितरत परिंदों सी थी मेरा मिज़ाज दरख़्तों जैसा
उसे उड़ जाना था और मुझे कायम ही रहना था

किसी की याद ने जख्मों से भर दिया है सीना
अब हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी


मुझ सा कोई शख्स नादान भी न हो
करे जो इश्क़ कहता है नुकसान भी न हो

Iqbal Shayari Wallpaper
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फूल चाहे थे मगर हाथ में आए पत्थर ,
हम ने आगोश- ऐ-मोहब्बत में सुलाये पत्थर ..
उठा कर चूम ली हैं चंद मुरझाई हुई कलियाँ ,
न तुम ए तो यूं जश्न -ऐ -बहाराँ कर लिया मैने ..

खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता ,
यह चीज़ वो है जो देखी कहीं कहीं मैंने ..

जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है ,
उन का हर ऐब भी ज़माने को हुनर लगता है …


तेरी बन्दा परवारी से मेरे दिन गुज़र रहे हैं
न गिला है दोस्तों का , न शिकायत -ऐ -ज़माना
और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना