Gulzar Poetry

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Gulzar Poetry
Gulzar Poetry

चंद रातों के खुवाब
उम्र भर की नींद मांगते है

यादों की अलमारी में देखा,
वहां मुहब्बत फटेहाल लटक रही है

ना जाने किस तरह का संग-तराश था वो भी।
मुझे इस तरह तराशा है, के पाश-पाश हो गए हैं

Gulzar Hindi Poetry
Gulzar Hindi Poetry

आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है
जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है…

एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद..
दूसरा सपना देखने के हौसले को ‘ज़िंदगी’ कहते हैं..

तेरे उतारे हुए दिन पहनके अब भी मैं,
तेरी महक में कई रोज़ काट देता हूँ !!

कि गहरी वादियाँ ख़ाली कभी नहीं होतीं
ये चिलमन बारिशों की भी उठा दूँगा, जब आओगे !

Gulzar Poetry Hindi Me
Gulzar Poetry Hindi Me
होंठ झुके जब होंठों पर,
साँस उलझी हो साँसों में…
दो जुड़वा होंठों की, बात कहो आँखों से.!!
क्यूं इतने लफजो में मुझे चुनते हो,
इतनी ईंटें लगती है क्या एक खयाल दफनाने में?

बहुत मुश्किल से करता हूँ,
तेरी यादों का कारोबार,
मुनाफा कम है,
पर गुज़ारा हो ही जाता है…

“पूछ कर अपनी निगाहों से बता दे मुझको,
मेरी राहों के मुकद्दर में सहर है कि नही..”

गुल से लिपटी हुई तितली को गिराकर देखो,
आँधियों तुमने दरख्तों को गिराया होगा।

Gulzar Poetry In Hindi
Gulzar Poetry In Hindi

“कभी कभी तो आवाज़ देकर
मुझको जगाया ख़्वाबो ने..!”

अपने होठों से चुन रहा हूँ
तुम्हारी सासों की आयतों को
कि जिसम के इस हसीन काबे पे
रूह सजदे बिछा रही है।

बहोत अंदर तक जला देती है,
वो शिकायतें जो बयाँ नही होती..

Gulzar Saheb Ki Poetry
Gulzar Saheb Ki Poetry

महदूद हैं दुआएँ मेरे अख्तियार में..
हर साँस हो सुकून की तू सौ बरस जिये…

”ये तुमने ठीक कहा है, तुम्हें मिला ना करूं
मगर मुझे ये बता दो कि क्यों उदास हो तुम?”
-Gulzar Hindi Font Shayari

इक उर्म हुई मैं तो हंसी भूल चुका हूँ,
तुम अब भी मेरे दिल को दुखाना नही भूले ।

Top Gulzar Poetry
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